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    नवप्रवर्तन

    विद्यालय में नवाचार एवं अभिनव गतिविधियाँ

    विद्यालय विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता तथा अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विद्यार्थियों को नए विचारों का अन्वेषण करने, व्यावहारिक कौशल विकसित करने तथा कक्षा में अर्जित ज्ञान को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में लागू करने के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न पहल की जा रही हैं।

    1. STEM गतिविधियों को बढ़ावा देना:
    विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तार्किक क्षमता, रचनात्मकता एवं समस्या-समाधान कौशल विकसित करने के लिए विभिन्न STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित) गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इन गतिविधियों के अंतर्गत विद्यार्थियों को प्रयोग करने, वैज्ञानिक मॉडल बनाने, नई अवधारणाओं का अन्वेषण करने तथा व्यावहारिक समस्याओं के समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

    2. BioE3 परियोजनाओं का क्रियान्वयन:
    विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों (Alumni) के मार्गदर्शन एवं सहयोग से विद्यार्थी BioE3 से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों में जैव प्रौद्योगिकी, जैव-आधारित नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता तथा वैज्ञानिक ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग के प्रति रुचि विकसित की जा रही है। विद्यार्थियों को समकालीन चुनौतियों के समाधान हेतु नवीन विचारों और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    3. पूर्व विद्यार्थियों एवं प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन:
    विद्यालय अपने पूर्व विद्यार्थियों के ज्ञान, अनुभव एवं व्यावसायिक संपर्कों का उपयोग विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की नवीनतम प्रगति से परिचित कराने के लिए कर रहा है। पूर्व विद्यार्थियों के सहयोग से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (NITs) तथा अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रोफेसरों एवं विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को मार्गदर्शन एवं परामर्श प्रदान किया गया है। इस प्रकार के संवाद एवं मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को उभरते हुए वैज्ञानिक क्षेत्रों, अनुसंधान पद्धतियों, नवीन तकनीकों तथा उच्च शिक्षा के अवसरों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।

    4. वास्तविक जीवन पर आधारित परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहन:
    शिक्षकों एवं पूर्व विद्यार्थियों द्वारा विद्यार्थियों को अपने आसपास की वास्तविक समस्याओं की पहचान करने तथा उनके व्यावहारिक एवं नवाचारी समाधान विकसित करने के लिए नियमित रूप से प्रेरित किया जा रहा है। परियोजना-आधारित शिक्षा, सामूहिक कार्य, डिजाइन थिंकिंग तथा सैद्धांतिक ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग पर विशेष बल दिया जाता है। विद्यार्थियों को ऐसे कार्यशील मॉडल, प्रोटोटाइप एवं परियोजनाएँ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जो स्थानीय आवश्यकताओं तथा सामाजिक समस्याओं के समाधान में सहायक हो सकें।

    5. विद्यालय एवं पूर्व विद्यार्थी समुदाय के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना:
    विद्यालय अपने पूर्व विद्यार्थियों को विद्यार्थियों के मार्गदर्शन, उनके अनुभव साझा करने, नवीन परियोजना संबंधी विचार प्रदान करने तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से संपर्क स्थापित कराने में सक्रिय रूप से सहभागी बना रहा है। इस सहयोगात्मक पहल से विद्यार्थियों को अनुभवी व्यक्तियों के ज्ञान, विशेषज्ञता एवं व्यावसायिक संपर्कों का लाभ प्राप्त हो रहा है। इससे विद्यालय में नवाचार एवं अनुसंधान के अनुकूल वातावरण विकसित हो रहा है।

    निष्कर्ष:
    उपर्युक्त पहलें पारंपरिक कक्षा शिक्षण से आगे बढ़कर नवाचार-आधारित, अनुभवात्मक एवं व्यावहारिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने के प्रति विद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। STEM गतिविधियों, BioE3 परियोजनाओं, पूर्व विद्यार्थियों के मार्गदर्शन तथा IITs और NITs जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों के सहयोग से विद्यालय विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है, ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नवप्रवर्तक एवं सक्षम नेतृत्वकर्ता बन सकें।